तीर्थवंशोपदेशः
Tīrtha-vaṃśa Upadeśa: Instruction on the Fruits of Sacred Waters
क्षात्रधर्मिणमप्याजी केतयेत् कुलजं द्विजम् । न त्वेव वणिजं तात श्राद्धे च परिकल्पयेत्
तात! जो कुलीन ब्राह्मण युद्ध में क्षात्रधर्म का पालन करता हो, उसे भी श्राद्ध में निमंत्रित करना चाहिए; पर जो वाणिज्य करता हो, उसे श्राद्ध में कभी सम्मिलित न करें।
भीष्म उवाच