Aṣṭāvakra–Strī-saṃvāda: Dhṛti, hospitality, and a dispute on autonomy
अथोपविष्टयोस्तत्र मणिभद्रपुरोगमा: । निषेदुस्तत्र कौबेरा यक्षगन्धर्वकिन्नरा:,जब कुबेर और अष्टावक्र दोनों वहाँ आरामसे बैठ गये तब कुबेरके सेवक मणिभद्र आदि यक्ष, गन्धर्व और किन्नर भी नीचे बैठ गये
athopaviṣṭayostatra maṇibhadrapurogamāḥ | niṣedustatra kauberā yakṣagandharvakinnarāḥ ||
जब कुबेर और अष्टावक्र दोनों वहाँ आराम से बैठ गए, तब मणिभद्र आदि कुबेर के सेवक—यक्ष, गन्धर्व और किन्नर—भी वहाँ समीप ही नीचे बैठ गए।
भीष्म उवाच