Chapter 2: Sudarśana Upākhyāna — Atithi-Dharma and the Conquest of Mṛtyu
Gṛhastha-Vrata
उटजस्थस्तु तं॑ विप्र: प्रत्युवाच सुदर्शनम् । अतिथ्थिं विद्धि सम्प्राप्तं ब्राह्मणं पावके च माम्
यह सुनकर कुटिया में बैठे ब्राह्मण ने सुदर्शन से कहा—“हे पावकपुत्र! जानो, मैं ब्राह्मण अतिथि बनकर तुम्हारे यहाँ आया हूँ।”
भीष्म उवाच