Chapter 2: Sudarśana Upākhyāna — Atithi-Dharma and the Conquest of Mṛtyu
Gṛhastha-Vrata
ततो विहस्य विप्रर्षि: सा चैवाथ विवेश ह । संस्मृत्य भर्तुर्वचनं गृहस्थाश्रमकाड्क्षिण:
तब विप्र-ऋषि मुसकराए और वह भी भीतर चली गई। गृहस्थ-धर्म का पालन करने की इच्छा रखने वाले पति की बात स्मरण करके उसने ब्राह्मण के सामने ‘हाँ’ कह दिया; तब वह विप्र-ऋषि ओघवती के साथ घर के भीतर प्रवेश कर गया।
भीष्म उवाच