दिष्ट्या प्राप्तोड्सि कौन्तेय सहामात्यो युधिष्ठिर । परिवृत्तो हि भगवान् सहस्रांशुर्दिवाकर:
कौन्तेय युधिष्ठिर! सौभाग्य है कि तुम मन्त्रियों सहित यहाँ आ पहुँचे हो। सहस्र किरणों वाले भगवान् दिवाकर सूर्य अब दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर लौट चुके हैं।
वैशम्पायन उवाच