अभिवाद्याथ कौन्तेय: पितामहमरिंदम । द्वैपायनादीन वि्रांश्न तैश्न प्रत्यभिनन्दित:
abhivādyātha kaunteyaḥ pitāmaham ariṃdama | dvaipāyanādīn viprāṃś ca taiś ca pratyabhinanditaḥ ||
तब शत्रुदमन कुन्तीपुत्र ने सबसे पहले पितामह को प्रणाम किया। इसके बाद उन्होंने व्यास आदि ब्राह्मणों को भी मस्तक झुकाकर वंदन किया; और उन सबने धर्मसम्मत वचनों से उनका स्वागत और अभिनंदन किया।
वैशम्पायन उवाच