यदा प्रमाणं प्रसव: स्वभावश्च सुखासुखे । दंशकीटपिपीलानां स्थिरो भव युधिछिर
युधिष्ठिर! डाँस, कीड़े और चींटी आदि प्राणियों को उन-उन योनियों में उत्पन्न करने और उन्हें सुख-दुःख दिलाने में, उनके अपने कर्मानुसार बना हुआ स्वभाव ही प्रमाण और कारण है। यह समझकर स्थिर हो जाओ।
भीष्म उवाच