कुपिते सुखमेधन्ते तस्मिन्नपि गुहागता: । पिनाकधारी रुद्र कुपित होकर जिन्हें भयंकररूपसे देख लें
जब पिनाकधारी रुद्र क्रोधित हो उठते हैं, तब जिन पर उनकी भयानक दृष्टि पड़ जाए, उनके हृदय भी चूर-चूर हो जाते हैं। संसार में भगवान् शंकर के कुपित होने पर देवता, असुर, गन्धर्व और नाग भागकर गुफाओं में छिप जाएँ, तो भी वे सुख से नहीं रह सकते।
वायुदेव उवाच