भीष्म उवाच इत्युक्त: स तदा तूष्णीमभूद् वायुस्ततो<ब्रवीत् । शृणु राजन् वसिष्ठस्य मुख्यं कर्म यशस्विन:
भीष्म ने कहा— ऐसा कहे जाने पर वह तब मौन ही रहा। तब वायु देवता बोले— “हे राजन्! अब यशस्वी वसिष्ठ मुनि के श्रेष्ठ कर्म को सुनो।”
भीष्म उवाच