कालयुक्तधर्मविवेकः
Discerning Dharma in Accord with Time
अवैरा ये त्वनायासा मैत्रीचित्तरता: सदा । सर्वभूतदयावन्न्तस्ते नरा: स्वर्गगामिन:
जिनके मन में किसी के प्रति वैर नहीं, जो आयासरहित, मैत्रीभाव से परिपूर्ण तथा समस्त प्राणियों पर सदा दया रखने वाले हैं—वे मनुष्य स्वर्गगामी होते हैं।
श्रीमहेश्वर उवाच