Rudra-Śiva: Names, Two Natures, and the Logic of Epithets (रुद्रनाम-बहुरूपत्व-प्रकरणम्)
उमोवाच गार्हस्थ्यो मोक्षधर्मक्ष सज्जनाचरितस्त्वया । भाषितो जीवलोकस्य मार्ग: श्रेयस्करो महान्
उमा बोलीं—भगवन्! आपने सत्पुरुषों द्वारा आचरित गार्हस्थ्य-धर्म और मोक्ष-धर्म का वर्णन किया है। ये दोनों ही जीव-लोक के लिए महान् कल्याणकारी, श्रेयस्कर मार्ग हैं।
श्रीमहेश्वर उवाच