Rudra-Śiva: Names, Two Natures, and the Logic of Epithets (रुद्रनाम-बहुरूपत्व-प्रकरणम्)
तस्य धर्मक्रिया देवि ब्रह्म॒चर्या च न्न्यायतः । व्रतोपनयनं चैव द्विजो येनोपपद्यते
देवि! उसे धर्म का अनुष्ठान करना और न्यायपूर्वक ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। व्रत-पालन सहित उपनयन-संस्कार उसके लिए परम आवश्यक है, क्योंकि उसी से वह द्विज कहलाता है।
श्रीमहेश्वर उवाच