Rudra-Śiva: Names, Two Natures, and the Logic of Epithets (रुद्रनाम-बहुरूपत्व-प्रकरणम्)
नारद उवाच ततो मुनिगण: सर्वस्तां देवीं प्रत्यपूजयत् । वाम्भिक्रग्भूषितार्थाभि: स्तवैश्वार्थविशारदै:
नारद बोले—तत्पश्चात् समस्त मुनिगण ने ऋग्वेद के अर्थ से अलंकृत वाणी और उत्तम अर्थयुक्त स्तोत्रों द्वारा देवी पार्वती की स्तुति-प्रशंसा करके उनका पूजन किया।
नारद उवाच