Rudra-Śiva: Names, Two Natures, and the Logic of Epithets (रुद्रनाम-बहुरूपत्व-प्रकरणम्)
अड्गुष्ठपर्वमात्रा ये भूत्वा स्वे स्वे व्यवस्थिता: । तपश्चरणमीहन्ते तेषां धर्मफलं महत्
उनमें से प्रत्येक का शरीर अंगूठे के पोर के बराबर है। इतने लघुकाय होकर भी वे अपने-अपने कर्तव्य में स्थित रहकर निरन्तर तपस्या करते हैं; उनके धर्म का फल महान् है।
श्रीमहेश्वर उवाच