Śatarudrīya-prabhāva and Rudra’s Supremacy (शतरुद्रीयप्रभावः)
तृतीयं चास्य सम्भूत॑ नेत्रमादित्यसंनिभम् | युगान्तसदृशं दीप्तं येनासौ मथितो गिरि:
तभी उनके ललाट में आदित्य के समान तेजस्वी तीसरे नेत्र का आविर्भाव हुआ। वह नेत्र युगान्त की प्रलयाग्नि के समान देदीप्यमान था। उस नेत्र से निकली ज्वाला ने उस पर्वत को जला कर चूर-चूर कर दिया।
नारद उवाच