ब्राह्मणपूजायां व्युष्टिः — Vyuṣṭi (Merit-Outcome) of Honoring Brāhmaṇas: Kṛṣṇa and Durvāsā
मृगैश्न विविधाकारैर्हाहाभूतमचेतनम् । शिखरं तस्य शैलस्य मथितं दीनदर्शनम्
नाना प्रकार के मृगों और अन्य जीवों के आर्तनाद से चारों ओर हाहाकार मच गया; मानो उस शैल का अचेतन शिखर ही करुण क्रन्दन कर रहा हो। उस तेज से दग्ध होकर वह पर्वत-शिखर मथित और दीन-सा दिखाई देने लगा।
भीष्म उवाच