Śiva-nāmānukīrtana-prastāvaḥ
Prologue to the praise of Śiva and the Upamanyu testimony
रुरुवानरशार्दूलसिंहद्वीपिसमाकुलम् । कुरड़बर्हिणाकीर्ण मार्जारभुजगावृतम् । पूगैश्न मृगजातीनां महिषर्क्षनिषेवितम्
उस आश्रम के निकट का वन रुरु, वानर, शार्दूल, सिंह और चीते से भरा था। वहाँ मृगों के झुंड, मयूर, बिल्ली और सर्प भी थे; और भैंस तथा रीछों का भी वहाँ निवास था।
वासुदेव उवाच