Śiva-nāmānukīrtana-prastāvaḥ
Prologue to the praise of Śiva and the Upamanyu testimony
उपमन्युरुवाच सदसद् व्यक्तमव्यक्तं यमाहुर्ब्रह्मवादिन: । नित्यमेकमनेकं च वरं तस्माद् वृणीमहे
उपमन्यु बोले—देवराज! ब्रह्मवादी महात्मा जिन्हें मत-मतान्तर के अनुसार सत्-असत्, व्यक्त-अव्यक्त, नित्य, एक और अनेक कहते हैं, उन्हीं से हम वर माँगेंगे।
शक्र उवाच