Śiva-nāmānukīrtana-prastāvaḥ
Prologue to the praise of Śiva and the Upamanyu testimony
शक्ररूपं स कृत्वा तु सर्वैर्देवगणैर्वृत: । सहस्राक्षस्तदा भूत्वा वज्रपाणिमहायशा:
तब वे समस्त देवगणों से घिरे हुए शक्र (इन्द्र) का रूप धारण करके आए। सहस्र नेत्रों से युक्त महायशस्वी वज्रपाणि इन्द्र के रूप में वे प्रकट हुए।
वासुदेव उवाच