Śiva-nāmānukīrtana-prastāvaḥ
Prologue to the praise of Śiva and the Upamanyu testimony
हृदि प्राणो मनो जीवो योगात्मा योगसंज्ञित: । ध्यानं तत्परमात्मा च भावग्राह्मो महेश्वर:
प्राणियों के हृदय में वही प्राण, वही मन और वही जीवात्मा होकर विराजते हैं। वही योगस्वरूप हैं, वही योगी हैं, वही ध्यान हैं और वही परमात्मा हैं। महेश्वर केवल भक्तिभाव से ही ग्रहण किए जाते हैं।
वासुदेव उवाच