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Mahabharata — Anushasana Parva, Shloka 17

Umā–Maheśvara-saṃvāda: Varṇa-bhraṃśa, Ācāra (Vṛtta), and Karmic Ascent/Decline

बलदेव उवाच श्रूयतां परमं गुहां मानुषाणां सुखावहम्‌ । अजानन्तो यदबुधा: क्लिश्यन्ते भूतपीडिता:

बलदेवजी बोले—मनुष्यों को सुख देने वाला यह परम गोपनीय विषय सुनो। जिसे न जानकर मूढ़ मनुष्य भूतों से पीड़ित होकर नाना प्रकार के कष्ट भोगते रहते हैं, वही मैं कह रहा हूँ।

बलदेव उवाच