Umā–Maheśvara-saṃvāda: Varṇa-bhraṃśa, Ācāra (Vṛtta), and Karmic Ascent/Decline
अपि वा ब्राह्माणं दृष्टवा ब्रह्मचारिणमागतम् । ब्राह्मणाग्रयाहुतिं दत्त्वा अमृतं तस्य भोजनम्
यदि ब्रह्मचारी ब्राह्मण को आया हुआ देखकर गृहस्थ पहले ब्राह्मण को उत्तम अन्न अर्पित करे और फिर स्वयं शेष अन्न ग्रहण करे, तो उसका वह भोजन अमृत के समान माना जाता है।
भीष्म उवाच