Vānaprastha-dharma and Tapas: Śiva–Umā Saṃvāda
Forest-Stage Discipline and Austerity
पात्रमौदुम्बरं गृह मधुमिश्र॑ तपोधन । कृतं भवति तै: श्राद्धं सरहस्यं यथार्थवत्
तपोधन! उदुम्बर का पात्र ग्रहण करके, मधु-मिश्रित (तिलोदक) से जो पितरों का तर्पण करता है, उसके द्वारा श्राद्धकर्म रहस्य-सहित यथार्थ रूप से सम्पन्न हो जाता है।
शक्र उवाच