Vānaprastha-dharma and Tapas: Śiva–Umā Saṃvāda
Forest-Stage Discipline and Austerity
लोकांस्तारयितुं शक्ता मर्त्येंष्वेतेषु देवता: । सर्वे भवन्त: शृण्वन्तु एकैकं धर्मनिश्चयम्
ये देवता मर्त्यलोक में स्थित होकर भी समस्त लोकों का उद्धार करने में समर्थ हैं। आप सब लोग सुनें; मैं एक-एक धर्म का निश्चय बतलाता हूँ।
शक्र उवाच