Vānaprastha-dharma and Tapas: Śiva–Umā Saṃvāda
Forest-Stage Discipline and Austerity
श्रोतार: श्रद्धधानाश्न येषां शुद्धं च मानसम् । तेषां व्यक्त जिता लोका: श्रद्धधानेन साधुना
जो श्रद्धापूर्वक धर्मशास्त्र का श्रवण करते हैं और जिनका मन शुद्ध है, वे श्रद्धालु एवं साधु-चित्त के बल से पुण्यलोकों पर निश्चय ही विजय पा लेते हैं।
भीष्म उवाच