अध्याय १२८: शिव–उमा संवादः — तिलोत्तमा, श्मशान-मेध्यता, तथा चातुर्वर्ण्य-धर्मः
Chapter 128: Śiva–Umā Dialogue—Tilottamā, the Ritual Valence of the Śmaśāna, and the Fourfold Duty-Code
प्रकाशार्थगतिर्नूनं रहस्यकुशल: कृती । तज्ज्ैर्न पूज्यसे नूनं तेनासि हरिण: कृश:
तुम्हारी अर्थगति—कार्यपद्धति—सबको विदित है; तुम रहस्य की बातों में कुशल और बुद्धिमान हो, फिर भी गुणज्ञ जन तुम्हारा सम्मान नहीं करते। इसी कारण तुम हरिण की भाँति पाण्डुवर्ण और दुर्बल हो रहे हो।
ब्राह्मण उवाच