Nārāyaṇa-tejas: Kṛṣṇa’s Vrata, the Fire-Manifestation, and the Sages’ Inquiry (अनुशासन पर्व, अध्याय १२६)
यानीहागमशास्त्राणि याश्न कश्षित् प्रवृत्तय: । तानि वेदं पुरस्कृत्य प्रवृत्तानि यथाक्रमम्
इस जगत में जितने भी आगम-शास्त्र हैं और जो-जो आचार-प्रवृत्तियाँ प्रचलित हैं, वे सब वेद को अग्रभाग में रखकर, उसी को प्रमाण मानकर, क्रमशः प्रवर्तित हुई हैं।
भीष्म उवाच