Nārāyaṇa-tejas: Kṛṣṇa’s Vrata, the Fire-Manifestation, and the Sages’ Inquiry (अनुशासन पर्व, अध्याय १२६)
दिष्टया नाभिभवन्ति त्वां दैवस्तेडयमनुग्रह: । “संसारके लोग उत्तम गुणवाले पुरुषकी ही अधिक प्रशंसा करते हैं। सौभाग्यकी बात है कि रूप
सौभाग्य से रूप, अवस्था और सम्पत्ति का अभिमान तुम पर प्रभाव नहीं डालता; यह देवताओं का महान् अनुग्रह है। संसार में लोग उत्तम गुणों वाले पुरुष की ही अधिक प्रशंसा करते हैं—इसमें कोई संशय नहीं।
भीष्म उवाच