Dāna–Tapaḥ Praśaṃsā and Gṛhastha-Upadeśa
Maitreya
व्यास उवाच भो भो ब्रद्यर्षभ श्रीमन् मा व्यथिष्ठा: कथंचन । शुभकृच्छुभयोनीषु पापकृत् पापयोनिषु
व्यास बोले—हे ब्राह्मणश्रेष्ठ, श्रीमान्! तुम किसी प्रकार भी व्यथित मत हो। शुभ कर्म करने वाला शुभ योनियों में और पाप करने वाला पाप-योनियों में जन्म लेता है।
व्यास उवाच