Dāna–Tapaḥ Praśaṃsā and Gṛhastha-Upadeśa
Maitreya
व्यास उवाच क्षात्रं देवव्रतं कीट भूतानां परिपालनम् । क्षात्रं देवव्रतं ध्यायंस्ततो विप्रत्वमेष्यसि
व्यासजी बोले—हे पूर्वजन्म के कीट! प्राणियों की रक्षा करना देवताओं का व्रत है; यही क्षात्र-धर्म है। इस देवव्रत रूप क्षात्र-धर्म का चिंतन और पालन करोगे तो आगे चलकर ब्राह्मणत्व को प्राप्त होओगे।
व्यास उवाच