Adhyāya 119: Vyāsa–Kīṭa-saṃvāda
Tapas-bala and karmic ascent across yoni
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २ श्लोक मिलाकर कुल २१ श्लोक हैं) अपन बक। ] अति्शशाएड पञ्चदशाधिकशततमो< ध्याय: मद्य और मांसके भक्षणमें महान् दोष
Yudhiṣṭhira uvāca | ahiṃsā paramo dharma ity uktaṃ bahuśas tvayā | jāto naḥ saṃśayo dharme māṃsasya parivarjane | doṣo bhakṣayataḥ kaḥ syāt kaś cābhakṣayato guṇaḥ ||
युधिष्ठिर बोले— पितामह! आपने बार-बार कहा है कि अहिंसा परम धर्म है। इसी से मांस-त्याग रूप धर्म के विषय में मेरे मन में संदेह उत्पन्न हो गया है। अतः आप बताइए— मांस खाने वाले को कौन-सा दोष लगता है और जो मांस नहीं खाता, उसे कौन-सा पुण्य प्राप्त होता है?
युधिछिर उवाच