मांसभक्षण-दोषाः तथा अहिंसाया माहात्म्यम् | Faults of Meat-Consumption and the Supremacy of Ahiṃsā
वैशम्पायन उवाच इत्युक्त्वा तं सुरगुरुर्धर्मराजं॑ युधिष्ठिरम् । दिवमाचक्रमे धीमान् पश्यतामेव नस्तदा
वैशम्पायन बोले—जनमेजय! धर्मराज युधिष्ठिर से ऐसा कहकर परम बुद्धिमान देवगुरु बृहस्पति, हम लोगों के देखते-देखते, उसी समय स्वर्गलोक को चले गए।
वैशम्पायन उवाच