Ahiṃsā as Threefold Restraint (Mind–Speech–Action) and the Ethics of Consumption
युधिछिर उवाच तद् दर्शितं भगवता यथा धर्मोडनुगच्छति । एतत् तु ज्ञातुमिच्छामि कथ्थ॑ रेत: प्रवर्तते
युधिष्ठिर ने पूछा—भगवन्! धर्म जिस प्रकार जीव का अनुसरण करता है, वह तो आपने समझा दिया। अब मैं यह जानना चाहता हूँ कि इस शरीर में वीर्य की उत्पत्ति कैसे होती है?
युधिछिर उवाच