मानसतीर्थ-शौचप्रशंसा | Praise of the ‘Mental Tīrtha’ and the Marks of Purity
अग्निकार्यपरो नित्यं नित्यं कल्यप्रबोधन: । अतितात्रस्य यज्ञस्य फल प्राप्रोत्यनुत्तमम्
जो नित्य अग्निकार्य में तत्पर रहता है, नित्य प्रातःकाल जागता है, वह अतिरात्र यज्ञ का अनुपम फल प्राप्त करता है।
भीष्म उवाच