उपवासविधि-प्रश्नः
Inquiry into the Discipline of Fasting
आचार्यशास्ता या जाति: सा सत्या साजरामरा | भारत! पिता और माता केवल शरीरकी सृष्टि करते हैं, किंतु आचार्यके उपदेशसे जो ज्ञानरूप नवीन जीवन प्राप्त होता है, वह सत्य, अजर और अमर है ।।
ācāryaśāstā yā jātiḥ sā satyā sājarāmarā | bhārata! pitā ca mātā ca kevalaṁ śarīrasṛṣṭiṁ kurutaḥ, kintu ācāryopadeśena yo jñānarūpaḥ navīnaḥ jīvanaḥ prāpyate sa satyaḥ ajaraḥ amaraś ca || jyeṣṭhā mātusamā cāpi bhaginī bharatarṣabha ||
हे भारत! आचार्य के उपदेश से जो जन्म होता है, वही सत्य—अजर और अमर—जन्म है। पिता और माता केवल शरीर की सृष्टि करते हैं; पर गुरु के उपदेश से ज्ञानरूप नया जीवन मिलता है, जो वास्तविक है—क्षय से परे और मृत्यु से परे। हे भरतश्रेष्ठ! ज्येष्ठा बहन भी माता के समान ही मानी जानी चाहिए।
भीष्म उवाच