ज्येष्ठ-कनिष्ठ-धर्मः — Duties of Elders and Juniors
Anuśāsana-parva 108
एतद् यशस्यमायुष्य॑ स्वर्ग्य स्वस्त्ययनं महत् | अनुकम्प्य सर्ववर्णान् ब्रह्मणा समुदाह्॒तम्
पूर्वकाल में ब्रह्माजी ने सब वर्णों के लोगों पर दया करके सदाचार-धर्म का यह उपदेश दिया था। यह यश, आयु और स्वर्ग की प्राप्ति कराने वाला तथा कल्याण का महान आधार है।
भीष्म उवाच