आचारप्रशंसा
Praise of Ācāra as the Basis of Longevity, Fame, and Prosperity
परस्य दण्डं नोद्यच्छेत् क्रुद्धो नैन॑ निपातयेत् । अन्यत्र पुत्राच्छिष्याच्च शिक्षार्थ ताडनं स्मृतम्
क्रोध में आकर किसी दूसरे पर न तो दण्ड उठाए, न उसे गिराए। केवल पुत्र या शिष्य को शिक्षा के लिए ताड़ना देना शास्त्रसम्मत माना गया है।
भीष्म उवाच