आचारप्रशंसा
Praise of Ācāra as the Basis of Longevity, Fame, and Prosperity
अद्विः प्राणान् समालभ्य नाभिं पाणितले तथा | स्पृशंश्वैव प्रतिछ्ेत न चाप्याद्रेण पाणिना
इसके बाद जल से आँख, नाक आदि इन्द्रियों और नाभि का स्पर्श करे तथा दोनों हथेलियों को धो ले। धोने के बाद गीले हाथ लेकर न बैठे; वस्त्र से पोंछकर उन्हें सुखा ले।
भीष्म उवाच