नहुषोपाख्यानम्—दीपदान-धूप-बलीकर्म-प्रशंसा
Nahūṣa Episode and the Commendation of Lamp-Gifting and Household Offerings
यावदक्षिनिमेषाणि ज्वलन्ते तावती: समा: । रूपवान् बलवांश्वापि नरो भवति दीपद:
जितने क्षण—आँखों के निमेष भर—दीपक जलता है, उतने ही वर्षों तक दीपदान करने वाला मनुष्य रूपवान् और बलवान् होता है।
भीष्म उवाच