उपदेशदोषप्रसङ्गः (Upadeśa-doṣa-prasaṅgaḥ) — The Risk of Misapplied Counsel
सुव्यक्त कारणं ह्वात्र न ते हास्यमकारणम् । कौतूहलं मे सुभृशं तत्त्वेन कथयस्व मे
आपके इस हँसने में स्पष्ट ही कोई विशेष कारण जान पड़ता है। आपका हँसना बिना कारण के नहीं हो सकता। इसे जानने के लिए मेरे मन में बड़ी उत्कण्ठा है; अतः आप यथार्थ रूप से यह सब कहिए।
पुरोहित उवाच