उपदेशदोषप्रसङ्गः (Upadeśa-doṣa-prasaṅgaḥ) — The Risk of Misapplied Counsel
पुरोहित उवाच पुण्याहवाचने नित्यं धर्मकृत्येषु चासकृत् । शान्तिहोमेषु च सदा कि त्वं हससि वीक्ष्य माम्
पुरोहित ने कहा—महाराज! प्रतिदिन पुण्याह-वाचन के समय, बार-बार धर्मकृत्य कराते समय, और सदा शान्तिहोम के अवसरों पर आप मेरी ओर देखकर क्यों हँसते रहते हैं?
पुरोहित उवाच