Śama-prāptiḥ — Gautamī–Lubdhaka–Pannaga–Mṛtyu–Kāla-saṃvāda
Restraint through the Analysis of Karma and Time
अस्मिन्नर्थे बहुविधा शान्तिरुक्ता पितामह । स्वकृते का नु शान्ति: स्थाच्छमाद् बहुविधादपि
पितामह! इस विषय में आपने शांति के अनेक उपाय बताए; पर अपने ही किए हुए अपराध के कारण, इन नाना प्रकार के शम के उपायों से भी शांति कैसे प्राप्त हो सकती है?
युधिछिर उवाच