Ādi-parva Adhyāya 98 — Paraśurāma’s kṣatriya suppression; Dīrghatamas, Bali, Sudēṣṇā, and the birth of Aṅga
सा च दृष्टवैव राजानं विचरन्तं महाद्युतिम् स्नेहादागतसौहार्दा नातृप्पत विलासिनी,वह भी वहाँ विचरते हुए महातेजस्वी राजा शान्तनुको देखते ही मुग्ध हो गयी। स्नेहवश उसके हृदयमें सौहार्दका उदय हो आया। वह विलासिनी राजाको देखते-देखते तृप्त नहीं होती थी
sā ca dṛṣṭvaiva rājānaṃ vicarantaṃ mahādyutim | snehād āgata-sauhārdā nātṛpyata vilāsinī ||
वह भी वहाँ विचरते हुए महातेजस्वी राजा शान्तनु को देखते ही मुग्ध हो गयी। स्नेहवश उसके हृदय में सौहार्द का उदय हुआ और वह विलासिनी राजा को देखते-देखते तृप्त न होती थी।
वैशम्पायन उवाच