ययाति-देवयानी-शर्मिष्ठा विवादः — Śukra’s Curse and the Disclosure of Lineage
क्रीडन्तीनां तु कन्यानां वने चैत्ररथोपमे । वायुभूत: स वस्त्राणि सर्वाण्येव व्यमिश्रयत्,वह वन चैत्ररथ नामक देवोद्यानके समान मनोहर था। उसमें वे कन्याएँ जलक्रीड़ा कर रही थीं। इन्द्रने वायुका रूप धारण करके उनके सारे कपड़े परस्पर मिला दिये
krīḍantīnāṃ tu kanyānāṃ vane caitrarathopame | vāyubhūtaḥ sa vastrāṇi sarvāṇy eva vyamiśrayat ||
चैत्ररथ-उद्यान के समान मनोहर उस वन में कन्याएँ क्रीड़ा कर रही थीं। इन्द्र ने वायु का रूप धारण करके उनके सब वस्त्रों को पूरी तरह आपस में मिला दिया।
वैशम्पायन उवाच