ययाति–देवयानी संवादः
Yayāti–Devayānī Dialogue and Śukra’s Consent
शुक्र उवाच अयमेहीति संशब्द्य मृतं संजीवयाम्यहम् । ततः संजीविनीं विद्यां प्रयुज्य कचमाह्नयत्,शुक्राचार्यने कहा--(बेटी! चिन्ता न करो।) मैं अभी “आओ” इस प्रकार बुलाकर मरे हुए कचको जीवित किये देता हूँ। ऐसा कहकर उन्होंने संजीवनी विद्याका प्रयोग किया और कचको पुकारा
शुक्राचार्य बोले—(बेटी, शोक न कर।) मैं अभी ‘आओ’ कहकर मरे हुए को भी जीवित कर दूँगा। यह कहकर उन्होंने संजीवनी विद्या का प्रयोग किया और कच को पुकारा।
शुक्र उवाच