अध्याय ७४: अक्रोध–क्षमा–निवासनीति
Chapter 74: Non-anger, Forbearance, and the Ethics of Residence
स विजित्य महीपालांक्ष॒कार वशवर्तिन: । चचार च सतां धर्म प्राप चानुत्तमं यश:,उन्होंने सब राजाओंको जीतकर अपने अधीन कर लिया तथा सत्पुरुषोंके धर्मका पालन और उत्तम यशका उपार्जन किया
sa vijitya mahīpālān kṣitīṃ cakāra vaśavartinaḥ | cacāra ca satāṃ dharmaṃ prāpa cānuttamaṃ yaśaḥ ||
उन्होंने पृथ्वी के समस्त राजाओं को जीतकर अपने वश में कर लिया; तथापि वे सत्पुरुषों द्वारा आचरित धर्म का पालन करते रहे और उसी से अनुपम यश को प्राप्त हुए।
वैशम्पायन उवाच