Adhyāya 71: Kaca and the Saṃjīvanī-vidyā
Devayānī–Śukra Episode
रूपयौवनमाधुर्यचेष्टितस्मित भाषणै: । लोभयित्वा वरारोहे तपसस्तं निवर्तय,“वरारोहे! अपने रूप, जवानी, मधुर स्वभाव, हाव-भाव, मन्न्द मुसकान और सरस वार्तालाप आदिके द्वारा मुनिको लुभाकर उन्हें तपस्यासे निवृत्त कर दो”
rūpayauvanamādhuryaceṣṭitasmitabhāṣaṇaiḥ | lobhayitvā varārohe tapasas taṃ nivartaya ||
“वरारोहे! अपने रूप, यौवन, मधुरता, हाव-भाव, मन्द मुस्कान और मधुर वाणी से उस मुनि को लुभाकर, उसे तपस्या से निवृत्त कर दो।”
कण्व उवाच