अग्निशाप-प्रसंगः
Agni’s Curse and the Restoration of Ritual Order
पृष्टो हि साक्षी यः साक्ष्यं जानानो5प्यन्यथा वदेत् । स पूर्वानात्मन: सप्त कुले हन्यात् तथा परान्,“जो साक्षी किसी बातको ठीक-ठीक जानते हुए भी पूछनेपर कुछ-का-कुछ कह देता --झूठ बोलता है, वह अपने कुलमें पहले और पीछेकी सात-सात पीढ़ियोंका नाश करता -5उन्हें नरकमें ढकेलता है
जो साक्षी किसी बात को ठीक-ठीक जानते हुए भी पूछने पर उलटा कह दे—झूठ बोले—वह अपने कुल की पहले और पीछे की सात-सात पीढ़ियों का नाश करता है।
शौनक उवाच