Śakuntalā-Janma-Nāmakaraṇa (Birth and Naming of Śakuntalā) | शकुन्तला-जन्म-नामकरणम्
अश्रिनौ गुहाकान् विद्धि सर्वोषध्यस्तथा पशून् | एते देवगणा राजन कीर्तितास्ते<नुपूर्वश:,अश्विनीकुमार, सर्वोषधि तथा पशु--इन सबको गुह्मकसमुदायके भीतर समझो। राजन! ये देवगण तुम्हें क्रमश: बताये गये हैं
aśvinau guhākān viddhi sarvoṣadhyas tathā paśūn | ete devagaṇā rājan kīrtitās te 'nupūrvaśaḥ ||
वैशम्पायन बोले—अश्विनीकुमारों, समस्त औषधियों और पशुओं को गुह्यकों के समुदाय में समझो। राजन्! ये देवगण तुम्हें क्रमशः बताए गए हैं।
वैशम्पायन उवाच