Duḥṣanta at Kaṇva-Āśrama; Śakuntalā’s Reception and Origin Prelude (दुःषन्तस्य कण्वाश्रमागमनम्)
अश्वग्रीवश्च सूक्ष्मश्न तुहुण्डश्व महाबल: । इषुपादेकचक्रश्न विरूपाक्षो हराहरी,उनमें महायशस्वी राजा विप्रचित्ति सबसे बड़ा था। उसके बाद शम्बर, नमुचि, पुलोमा, असिलोमा, केशी, दुर्जय, अयःशिरा, अश्वशिरा, पराक्रमी अश्वशंकु, गगनमूर्धा, वेगवान्, केतुमान्, स्वर्भानु, अश्व, अश्वपति, वृषपर्वा, अजक, अभश्वग्रीव, सूक्ष्म, महाबली तुहुण्ड, इषुपाद, एकचक्र, विरूपाक्ष, हर, अहर, निचन्द्र, निकुम्भ, कुपट, कपट, शरभ, शलभ, सूर्य और चन्द्रमा हैं। ये दनुके वंशमें विख्यात दानव बताये गये हैं
aśvagrīvaś ca sūkṣmaś ca tuhuṇḍaśva mahābalaḥ | iṣupāda ekacakraś ca virūpākṣo harāharī ||
अश्वग्रीव और सूक्ष्म; महाबली तुहुण्ड; इषुपाद और एकचक्र; तथा विरूपाक्ष, हर और अहर भी थे।
वैशम्पायन उवाच